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तेरा रुठना

तेरे होने और ना होने के बीच
एक जंग सी छिड़ जाती है

कभी हंसने को जी करता है
कभी दरिया बन आ जाती है
तेरे होने और ना होने के बीच
एक जंग सी छिड़ जाती है

तू हो कर भी क्यूँ नहीं
और जो तू नहीं, तो फिर क्यों है
तेरे होने और ना होने के बीच
एक जंग सी छिड़ जाती है

न जीना गंवारा तेरे बगैर
ना तेरे पास आना मुमकिन है
तेरे होने और ना होने के बीच
एक जंग सी छिड़ जाती है

तू रुठ जा या मान जा
परे हूँ तेरी अठखेलियों से
तेरे रूठने और मान जाने पे
एक जंग सी छिड़ जाती है

तेरे होने और ना होने के बीच
एक जंग सी छिड़ जाती है

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Thoughts

ठहराव

नींद नहीं इन आँखों मे
पर कोई सपना भी तो नहीं

देखती हूँ खुली आँखों से
पर कोई अपना भी तो नहीं

इंतजार है आँखों मे
पर ये उसका तो नहीं

रोक रखा है जज़्बातों को
पर ये बूंदें तो रूकती नहीं

नहीं चाहती नज़रें कुछ कहना
पर दुनिया की नज़रो से ये छुपती भी तो नहीं

बंद भी कर लूँ चाहे ये नज़रें
पर नज़ारे ठहरते भी तो नहीं

अजीब सफर है जिंदगी का कई बार बदलना चाहा
पर चाहने से ये जिंदगी बदलती भी तो नहीं

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Thoughts

तू काफी नहीं

जिंदगी तू काफी नहीं जीने के लिए
कोई तो वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

जो आए लब पे हंसी
तो लगता है तू कितनी हंसीन है
जो आए आँखो मेंं आँसू
तो लगता है तू कितनी दर्दनाक है
चाहे नज़रिया मेरा बदलता है
पर इलजा़म तुझपे ही आता है

फिर भी तू काफी नहीं जीने के लिए
कोई और भी वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

समझ नही आता कि क्या कहूं
तुझपे तरस खाऊँ या गिला करुं
पता नहीं कि तू मुझे रौंद रही
या कुचल रहा मैं तुझे अपने कदमों तले
चाहे पाँव किसी के भी हों
पर दर्द है सिर्फ मेरे लिए

जिंदगी तू क्यूूँ काफी नहीं जीने के लिए
क्यों कोई और वजह चाहिए हंसने के लिए रोने के लिए

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जिंदगी दिल्लगी है

जिंदगी दिल्लगी है इसे दिल से ना लगा
हर पल का मज़ाक है इसे दिल से ना लगा

जो रूठ जाए ये तुमसे तो समझ
दे रही है ये वजह जीने की
जो रूठ जाए ये तुमसे तो समझ
दे रही है ये वजह जीने की
गर ये रूठ जाए तुमसे इसे दिल से ना लगा

जो ये दे खुशी तो समझ
दे रही है ये ताक़त तुझे फिर से जीने की
जो ये दे खुशी तो समझ
दे रही है ये ताक़त तुझे फिर से जीने की
गर ये खुशी बनकर आए इसे दिल से ना लगा

टूटना बिखरना तो जिंदगी का खेल है
तोड़ कर रख देगी तुझे और फिर कहेगी संभल
टूटना बिखरना तो जिंदगी का खेल है
तोड़ कर रख देगी तुझे और फिर कहेगी संभल
तू टूट कर संभल जा पर इसे दिल से ना लगा

जिंदगी दिल्लगी है इसे दिल से ना लगा
हर पल का मज़ाक है इसे दिल से ना लगा

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बात नही होती

दिल चुपके से रो देता है क्योंकि बात नहीं होती तुमसे
दिल कहने को तरसता है पर बात नहीं होती तुमसे

य तुमपे ही तो मरता है पर कुछ कहने से डरता है
तेरी एक झलक बस पाने को दिन रात ये आहे भरता है
ये चलता है फिर रुक जाता फिर कुछ नही कह पाता तुमसे
फिर चुपके से रो देता है क्योंकि बात नहीं होती तुमसे

एक बार जो सामने आ जाओ दिल खोल के रख दूँगा मैं
ना माँगू तुमसे कोई रिश्ता न कोई आस रखूंगा मैं
तुम खुश रहो यह काफी है पर यह भी नही कहता तुमसे
फिर चुपके से रो देता है क्योंकि बात नहीं होती तुमसे

क्या करूँ ज़िक्र मैं बूंदों का ये टिकता कब है आँखों मे
देख ले जिस दिन तुझको ये बह जाएगा ये धारों मे
जी भर के देखेगा तुमको कह ना पायेगा ये कुछ तुमसे
और फिर रो देगा ये छुपके से क्योंकि बात नहीं होती तुमसे

दिल चुपके चुपके रो देता है क्योंकि बात नहीं होती तुमसे
दिल कहने को तरसता है पर बात नहीं होती तुमसे

 

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प्यार मेरा कम ना होगा

तेरे रूठ जाने से प्यार ये मेरा कम ना होगा
तेरे होठों पे लाख़ इंकार सही मेरा इकरार कम ना होगा

तू न आ मुझको नज़र कोई बात नहीं
मेरी आँखों मे तेरा इंतज़ार कम ना होगा
तू सोचती है तेरी बेरुख़ी से टूट जाउंगा मैं
तुझे ख़बर नहीं कि सिलसिला है चाहतों का
जो अब कभी तेरे चाहने से कम ना होगा

तू कहती है कि तुझको भूल जाऊँ मैं
पर तुझको भी मुझे खोने का ग़म कम ना होगा
ग़ुरूर है तुझको मेरे प्यार पे मालूम है मुझे
जानता हूँ तेरा मेरे पास आना मुमकिन न होगा

तू मेरी नहीं इस बात का ग़म है मुझको
तुझे मेरे दर्द से वाक़िफ तो होना ही होगा
रोक नहीं सकती तू मुझको ‘ख़ुद’ को चाहने से
तेरी यादों को मेरी आदत में शामिल होना ही होगा

तेरे रूठ जाने से प्यार ये मेरा कम ना होगा
तेरे होठों पे लाख़ इंकार सही मेरा इकरार कम ना होगा!

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Lamha phisal gaya

Aaj phir ek lamha phisal gaya hatho se
Lo ek din aur gujar gaya baton baton mein
Waqt nahi hota ki rok loon waqt ko
Dekho ye phir badal gaya raton mein

Baithi sochti hoon kyun ruk si gai hai jindgi
Shayad thodi thak si gayi hai jindgi
Wahi din wahi raatein hain
Bina sapnon ki phir wohi batein hain
Aur aankhon mein phir wahi barasate hain
Lo ye phir badal gaya ye baton baton mein

Gher liya hai phir se doston ne
Phir wahi chai ki pyali aur samoso ne
Goonj rahi phir hansi ki awaz hai
Jaise jindgi mein phir se naya raag hai
Phir se udne ko mann bekaraar hai
Aur ye phir badal gaya shamon mein

Chal padi hain rahein phir se
Ek nayi manzil ke liye
Phir naya raasta phir naye log hain
Badh chale phir kadam ek nayi manzil ke liye
Thoda hasa kar thoda rula kar
Lo ye phir badal gaya hathon mein aakar

Aaj phir ek lamha phisal gaya hatho se
Lo ek din aur gujar gaya baton baton mein